बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Brief Lifesketch of Allama Iqbal | अल्लामा इक़बाल के जीवन की संक्षिप्त जानकारी


1877: सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्म हुआ, नवंबर 09, इक़बाल कश्मीरी मूल के थे। 
1893-1895: स्कॉच मिशन स्कूल, सियालकोट से मेट्रिक तथा इंटर की उपाधि प्राप्त की। 
1897: गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से अरबी तथा फिलॉसफी में स्नातक की उपाधि। कॉलेज में अरबी और अंग्रेज़ी विषयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर इक़बाल को दो स्वर्ण पदक मिले।
1899: गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से फिलॉसफी में स्नातकोत्तर (एम. ए.) की उपाधि। पंजाब प्रान्त में प्रथम स्थान प्राप्त किया, स्वर्णपदक से सम्मानित किए गए।
1899: ओरिएण्टल कॉलेज, लाहौर में रीडर (अरबी) नियुक्त किए गए।
1900: अंजुमन-ए-हिमायत-ए-इस्लाम, लाहौर के वार्षिकोत्सव में अपनी नज़्म "नाला-ए-यतीम" (Wails of an Orphan) पढ़ी।
1901: 'मख़ज़न' में नज़्म "हिमाला" (हिमालय) प्रकाशित हुई।
1903: लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर नियुक्ति हुई।
1903: पहली पुस्तक "इल्म-अल-इक़्तिसाद" (Study of Economics) प्रकाशित हुई।
1905: उच्च शिक्षा के लिए यूरोप की ओर प्रस्थान किया।
1907: जर्मनी के म्युनिक विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। (शीर्षक: पर्शिया में अध्यात्मविज्ञान का विकास)
1907–1908: लंदन विश्विद्यालय में प्रोफ़ेसर (अरबी) नियुक्त किए गए।
1908: लंदन में बार-एट-लॉ।
1908: भारत वापसी।
1908: 22 अक्टूबर से वकालत शुरू की। इस दौरान फिलॉसॉफी (दर्शन) तथा अंग्रेज़ी साहित्य के अंशकालिक (पार्ट-टाइम) प्रोफ़ेसर भी रहे।
1911: लाहौर में सुप्रिसद्ध रचना "शिकवा" लिखी।
1911: लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में प्रोफ़ेसर (फिलॉसॉफी) के पद पर नियुक्ति हुई।
1912: कालजयी रचना "जवाब-ए-शिकवा" लिखी।
1913: मिडिल स्कूल स्टूडेंट के लिए "हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया" लिखी।
1915: फ़ारसी में "असरार-ए-ख़ुदी" (Secrets of Self) लिखी।
1915: प्रोफ़ेसर के पद से त्यागपत्र दिया।
1918: फ़ारसी की एक अन्य रचना "रुमूज़-ए-बेख़ुदी" (Mysteries of Selflessness) लिखी।
1920: आर. ए. निकोल्सन द्वारा असरार-ए-ख़ुदी का अंग्रेज़ी अनुवाद किया गया। इसी दौरान अल्लामा ने कश्मीर का दौरा किया और अपनी मशहूर नज़्म "साक़ीनामा" पढ़ी।
1923: 01 जनवरी 1923 में लाहौर में "नाईटहुड" से अलंकृत हुए अर्थात इस दिन से आपको "सर इक़बाल" कहा जाने लगा। 1923 में ही अल्लामा की फ़ारसी रचना "पयाम-ए-मशरिक़" (The Message of the East) विश्व क्षितिज पर आई। इक़बाल ने यह रचना जर्मन लेखक यॉहान वॉफ़गांग फॉन गॉता (Goethe) की एक रचना के प्रतियुत्तर में लिखी।
1924: मार्च माह में उर्दू काव्य संग्रह "बांग-ए-दरा" प्रकाशित हुआ।
1926: पंजाब लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य चुने गए (1926–1929)
1927: फ़ारसी में "ज़बूर-ए-अजम" प्रकाशित हुई।
1929: उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में 6 व्याख्यान दिए।
1930: इलाहाबाद में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के अध्यक्ष रहे।
1931: इस्लाम में धार्मिक विचार के पुनर्निर्माण  पर केंद्रित 6 व्याख्यान का संग्रह लाहौर से प्रकाशित हुआ। यह संग्रह ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने भी छापा।
1931: फिलिस्तीन में "विश्व मुस्लिम सम्मेलन" (World Muslim Conference) में भाग लिया।
1931: लंदन में द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन (07 सितंबर-31 दिसंबर) में भाग लिया।
1932: पैरिस गए। वहाँ फ्रेंच दार्शनिक बर्गसन और मसिगनन से भेंट की।
1932: इतालवी कवि डेंटी (Dante) द्वारा रचित "डिवाइन कॉमेडी" के प्रतियुत्तर में फ़ारसी में जावेदनामा प्रकाशित की।
1932: लंदन में तीसरे गोलमेज़ सम्मेलन (17 नवंबर -24 दिसंबर) में भाग लिया।
1933: रोम में मुसलोनी से मिले।
1933: कॉर्डोबा विहार हेतु स्पैन गए। वहाँ "दुआ"(Supplication) और "मस्जिद-ए-कुर्तबा"(The Mosque of Cordoba) लिखीं।
1933: अक्टूबर में अफ़ग़ानिस्तान सरकार के उच्च शिक्षा सलाहकार नियुक्त हुए।
1933: 4 दिसंबर को पंजाब विश्विद्यालय ने डी.लिट्ट. की मानद उपाधि से नवाज़ा।
1934: फ़ारसी में "मुसाफ़िर" (Traveller) प्रकाशित।
1935: उर्दू में "बाल-ए-जिबरील" प्रकाशित।
1936: "ज़र्ब-ए-कलीम" प्रकाशित।
1937: विश्विख्यात अल-अज़हर विश्वविद्यालय (मिस्र) के विद्वान अल्लामा इक़बाल से मिलने लाहौर आए।
1938: पंडित जवाहर लाल नेहरू अल्लामा से मिलने लाहौर तशरीफ़ ले गए। 21 अप्रैल को लाहौर में अल्लामा का निधन। काव्य संग्रह "अरमग़ान-ए-हिजाज़" मरणोपरान्त छपा।