बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Raam | राम

एक पेन्टिंग में श्रीराम शबरी के झूठे बेर खाते हुए।

लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिन्द
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिन्द।

यह हिन्दीयों के फ़िक्र-ए-फ़लक रस का है असर
रिफ़अत में आसमाँ से भी ऊँचा है बाम-ए-हिन्द।

इस देस में हुए हैं हज़ारों मलक-ए-सरश्त
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिन्द।

है राम के वुजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहले-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिन्द।

ऐजाज़ उस चिराग़-ए-हिदायत का है यही
रोशन तर अज़  सहर है ज़माने में शाम-ए-हिन्द।

तलवार का धनी था, शुजाअत में फर्द था
पाकीज़गी में, जोश-ए-मुहब्बत में फर्द था।
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व्याख्या:
इस कलाम में अल्लामा इक़बाल ने श्री राम चन्द्र जी की प्रशंसा में शेर कहे हैं। श्री रामचन्द्र हिन्दू धर्म में अत्यन्त सम्मानीय और पूजनीय हैं। आप का समूचा व्यक्तित्व विशेषताओं का महासागर था। यही वजह हैं कि आपको "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप में जब कभी "हक़ और बातिल" के बीच टकराव की मिसाल दी जाती हैं तो उनमें हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और श्री रामचन्द्र जी का संघर्ष सर्वोपरि होता है। रामचन्द्र जी अपने माँ-बाप के बहुत आज्ञाकारी थे जो चौदह वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार लेते हैं। गुणों, विशेषताओं और आदर्शों की सारी पूँजी माँ-बाप के आदर, सेवा और आज्ञापालन से होती है। बहादुरी, रणकौशल, सहिष्णुता, स्नेह, त्याग, पवित्रता, ज्ञान इत्यादि जिन विशेषताओं को अल्लामा ने अपने इस कलाम में शामिल किया है, वास्तव में वो सब माता-पिता के प्रति श्रद्धा के कारण हैं। श्री राम चन्द्र जी की शख़्सियत में नयी पीढ़ी के लिए शिक्षाओं का भरपूर ख़ज़ाना ईश्वर ने प्रदान किया है। 

लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिन्द
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिन्द।

इस शेर में "हक़ीक़त" शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं जैसे यह परम सत्य कि इन्सान फ़ानी अर्थात नश्वर (mortal) है। दूसरा अर्थ "भौतिकवाद" और "आध्यात्मवाद" के सम्बन्ध में हो सकता है जिसका सम्बन्ध ईश्वर के अस्तित्व से है। तीसरा अर्थ 'दर्शन और ज्ञान' से सम्बन्ध रखता है। यहाँ तीनों अर्थ एक दूसरे से बहुत जुड़े हुए हैं। अल्लामा इक़बाल कहते हैं भारतीय दर्शन (Indian Philosophy) में जीवन, ज्ञान इत्यादि की वास्तविकता को पहचानने के लिए प्रचुर संसाधन हैं। भारतीय दर्शन का प्याला हक़ीक़त की शराब से भरा हुआ है। यही वजह है कि पश्चिमी दार्शनिक भी भारतीय दर्शन का अनुसरण करते हैं और इस महासागर से पीते हुए नज़र आते हैं। 
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लबरेज़: ऊपरी किनारों तक लबालब भरा हुआ बर्तन शराब-ए-हक़ीक़त: सच्चाई की शराब हिन्द: हिन्दोस्तान फ़लसफ़ी: दार्शनिक, फिलॉसफर ख़ित्ता-ए-मग़रिब: पश्चिमी जगत, यूरोप राम-ए-हिन्द: भारतीय दर्शन के अनुयायी (यहाँ 'राम' फ़ारसी शब्द है जिसका अर्थ आज्ञा मानना अथवा अनुसरण करना है )
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यह हिन्दीयों के फ़िक्र-ए-फ़लक रस का है असर
रिफ़अत में आसमाँ से भी ऊँचा है बाम-ए-हिन्द।

भारत में बड़े-बड़े ज्ञानी, महात्मा, सिद्ध पुरुष गुज़रे हैं जिनकी फ़िक्र (सोच) आसमान से भी बुलन्द थी। इसी वजह से ज्ञान, विवेक और दर्शन में भारत आकाश से भी ऊँचा मक़ाम रखता है। भारत ज्ञान के उस शीर्ष पर विराजमान है जहाँ से आसमान भी छोटा दिखाई देता है।
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हिन्दीयों के: हिन्दुस्तानियों के फ़िक्र-ए-फ़लक रस: आकाश से भी ऊँचा ज्ञान, दर्शन, महारत रिफ़अत: ऊँचाई, दक्षता बाम: छत, उत्कर्ष, शीर्ष।
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इस देस में हुए हैं हज़ारों मलक-ए-सरश्त
मशहूर जिनके दम से है दुनिया में नाम-ए-हिन्द।

इक़बाल कहते हैं कि भारत में हज़ारों लोग ऐसे भी रहे हैं जो फ़रिश्ता-सिफ़त अर्थात मासूम हों। उनके अस्तित्व के बल पर भारत का दुनिया भर में नाम है। इस शेर में अल्लामा इक़बाल श्री राम जैसे नेक लोगों की तरफ इशारा कर रहे हैं। फ़रिश्ता-सिफत लोगों में महात्मा गौतम बुद्ध, गुरु नानक, हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती, हज़रत निजामुद्दीन औलिया जैसे महान लोग हैं जिनकी ख्याति पूरे विश्व में है। 
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देस: देश का उर्दू समानार्थी मलक-ए-सरश्त: ऐसे सन्त और पवित्र लोग जो फ़रिश्तों जैसे आचरण वाले थे
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है राम के वुजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहले-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिन्द।

नेक लोगों की बात की जाए तो श्री रामचन्द्र जी के अस्तित्व पर सम्पूर्ण भारत गर्व महसूस करता है और विद्वान और भद्रजन उनको 'इमाम-ए-हिन्द' कहते हैं।
इस्लाम धर्म में "इमाम" का बहुत महत्व है। पैग़म्बरों के बाद इमाम सर्वोपरि होते हैं। जैसे इमाम अली, इमाम हसन, इमाम हुसैन, इमाम जाफ़र, इमाम मेंहदी, इमाम अबू-हनीफ़ा, इमाम शाफ़ई इत्यादि। पैग़म्बरों को अल्लाह की ओर से दैवीय ग्रन्थ (जैसे तौरेत, इन्जील, क़ुरआन) प्रदान किये जाते हैं। जबकि इमाम पैग़म्बरों की शिक्षाओं को जनता में आम करते हैं। चूँकि श्री रामचन्द्र से कोई दैवीय ग्रन्थ सम्बंधित नहीं है इसलिए अल्लामा ने उनको दूसरी सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में रखा है।
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वुजूद: अस्तित्व नाज़: फ़ख्र, गर्व अहले-नज़र: विद्वान लोग इमाम: अगुवाई करने वाला, मार्गदर्शक, लीडर।
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ऐजाज़ उस चिराग़-ए-हिदायत का है यही
रोशन तर अज़  सहर है ज़माने में शाम-ए-हिन्द।

श्रीरामचन्द्र जी भारत में मार्गदर्शक के रूप में तशरीफ़ लाए और सत्य की शिक्षा दी। वो हिदायत के चिराग़ की तरह थे जो भटके हुए लोगों को सच्चा रास्ता दिखाता है। इसी चिराग की वजह है कि यहाँ की शामें सुबह से भी ज़्यादा रोशन हैं। 
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ऐजाज़: करामत, चमत्कार, मोजज़ा हिदायत: मार्गदर्शन
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तलवार का धनी था, शुजाअत में फर्द था
पाकीज़गी में, जोश-ए-मुहब्बत में फर्द था।

श्री रामचन्द्र जी कुशल योद्धा थे और वीरता में अद्वितीय। उनके जैसी पवित्रता और सहिष्णुता समाज में और कहीं देखने को नहीं मिलती। 
रामचन्द्र जी की सहिष्णुता की मिसाले भारतीय समाज में आम हैं जैसे शबरी के झूठे बेर खाना, भाई लक्ष्मण से अपार स्नेह, सौतेली माँ से सत्कार का व्यवहार इत्यादि। 
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तलवार का धनी: रण-कौशल में महारथी शुजाअत: बहादुरी फर्द: अद्वितीय, यकता, जिसकी तरह दूसरा कोई न हो पाकीज़गी: पवित्रता  
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