बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Apni Jolangah | अपनी जौलाँगाह



अपनी जौलाँगाह ज़ेरे आसमाँ समझा था मैं 
आब-ओ-गिल के खेल को अपना जहाँ समझा था मैं। 
Methought (Me-thinks) my racing field lay under the skies,
This plaything of water and clay, I regarded as my world;
*

बेहिजाबी से तेरी टूटा निगाहों का तिलिस्म 
इक रिदा-ए-नीलगूँ को आसमाँ समझा था मैं। 
Thy unveiling broke the spell of searching glances,
I mistook this blue vault for Heaven.
*

कारवाँ थक कर फ़ज़ा के पेच-ओ-ख़म में रह गया 
महर-ओ-माहो मुश्तरी को हम-अनां समझा था मैं। 
The Sun, the Moon, the Stars, methought, would keep me company,
Fatigued, they dropped out in the twists and turns of space:
*

इश्क़ की एक जस्त ने तय कर दिया क़िस्सा तमाम 
इस ज़मीनो आसमाँ को बे-करां समझा था मैं। 
One leap by Love ended all the pother,
I fondly imagined, the earth and sky were boundless.
*

कह गयीं राज़-ए-मुहब्बत पर्दादारीए हाए शौक़ 
थी फ़ुग़ाँ वो भी जिसे ज़ब्ते फ़ुग़ाँ समझा था मैं। 
*

थी किसी दर्दमांदा रहरू की सदा-ए-दर्दनाक 
जिस को आवाज़-ए-रहील-ए-कारवाँ समझा था मैं।
What I esteemed as the clarion call of the caravan,
Was but the plaintive cry of a traveller, weary and forlorn.
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English Translation: Iqbal Urdu Blog