बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Eid Par | ईद पर शेर लिखने की फ़रमाइश के जवाब में



यह शालामार में इक बर्ग-ए-ज़र्द कहता था
गया वो मौसम-ए-गुल जिसका राज़दार हूँ मैं।

न पायमाल करें मुझको ज़ायरान-ए-चमन
उन्हीं की शाख़-ए-नशेमन की यादगार हूँ मैं।

ज़रा से पत्ते ने बेताब कर दिया दिल को
चमन में आके सरापा ग़म-ए-बहार हूँ मैं।

ख़िज़ाँ में मुझको रुलाती है याद-ए-फ़स्ल-ए-बहार
ख़ुशी हो ईद की क्यूँकर क: सोगवार हूँ मैं।

उजाड़ हो गए अहद-ए-कोहन के मयख़ाने
गुज़िश्ता बादा-परस्तों की यादगार हूँ मैं।

पयाम-ए-ऐश-ओ-मसर्रत हमें सुनाता है
हिलाल ईद का हमारी हँसी उड़ाता है।
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