बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Ya Rab ! Ye Jahane Guzran | या रब ! यह जहान-ए-गुज़राँ



या रब ! यह जहान-ए-गुज़राँ ख़ूब है लेकिन
क्यूँ ख़्वार हैं मर्दान-ए-सफ़ा कैश-ओ-हुनरमंद। 
Lovely, oh Lord, this fleeting world; but
Why must the frank heart, the quick brain, droop and sigh?
*

गो उसकी ख़ुदाई में महाजन का भी है हाथ 
दुनिया तो समझती है फ़रंगी को ख़ुदावन्द। 
Though usury mingle somewhat with his godship,
The white man is the world’s arch‐deity;
*

तू बर्ग-ए-गया है नदही अहले ख़िरद रा 
औ किश्त-ए-गुल-ओ-लाला बा-बख्शदबा ख़रे चन्द !
One wisp of hay to genius You deny; 
His asses graze in fields of rose and poppy:
*

हाज़िर हैं कलीसा में कबाब-ओ-मय-ए-गुलगूँ 
मस्जिद में धरा क्या है बजुज़ मोअज़ा-ओ-पंद !
His Church abounds with roasts and ruby wines:
Sermons and saws are all Your mosques supply.  
*

अहकाम तेरे हक़ हैं मगर अपने मुफ़स्सिर 
तावील से क़ुरआँ को बना सकते हैं पाज़न्द !
Your laws are just, but their expositors
Bedevil the Koran, twist it awry;
*

फ़िरदौस जो तेरा है किसी ने नहीं देखा 
अफ़रंग का हर क़रया है फ़िरदौस की मानन्द !
Your paradise no‐one has seen:
In Europe no village but with paradise can view.
*

मुददत से है आवारा-ए-अफ़लाक मेरा फ़िक्र 
कर दे इसे अब चाँद की ग़ारों में नज़रबन्द। 
Long, long have my thoughts wandered about heaven;
Now in the moon’s blind caverns let them sty! 
*

फ़ितरत ने मुझे बख़्शे हैं जौहर-ए-मलकूती 
ख़ाकी हूँ मगर ख़ाक से रखता नहीं पैवन्द !
I, dowered by Nature with empyrean (celestial) essence,
Am dust—but not through dust does my way lie;
*

दरवेश-ए-ख़ुदामस्त न शर्क़ी है न ग़रबी 
घर मेरा न दिल्ली, न सफ़ाहाँ, न समरक़न्द !
Nor East, nor west my home,
Nor Samarkand, nor Ispahan nor Delhi; in ecstasy,
*

कहता हूँ वही बात समझता हूँ जिसे हक़ 
ने आबला-ए-मस्जिद हूँ, न तहज़ीब का फ़रज़न्द !
God‐filled, I roam, speaking what truth I see
No fool for priests, nor yet of this age’s fry.
*

अपने भी ख़फ़ा मुझसे हैं, बेगाने भी नाख़ुश 
मैं ज़हर-ए-हलाहल को कभी कह न सका क़ंद !
My folk berate me, the stranger does not love me:
Hemlock for sherbet I could never cry; 
*

मुश्किल है क: इक बन्दा-ए-हक़बीन-ओ-हक़अन्देश 
ख़ाशाक के तूदे को कहे कोह-ए-दमावन्द !
How could a weigher of truth (True Believer)
See Mount Damawand and think a common refuse‐heap as high?
*

हूँ आतिश-ए-नमरूद के शोलों में भी ख़ामोश 
मैं बन्दा-ए-मोमिन हूँ, नहीं दाना-ए-इसपन्द !
In Nimrod’s fire faith’s silent witness,
Not like mustard‐seed in the grate burned sputteringly - I am a True Momin - God's Man
*

पुरसोज़-ओ-नज़रबाज़-ओ-निकोबीन-ओ-कम आज़ार 
आज़ाद-ओ-गिरफ़्तार-ओ-तहीकीसा-ओ-ख़ुरसन्द !
Blood warm, gaze keen, right‐following, wrong‐forswearing,
In fetters free, prosperous in penury
*

हर हाल में मेरा दिल-ए-बे-क़ैद है ख़ुर्रम 
क्या छीनेगा ग़ुन्चे से कोई ज़ौक़-ए-शकरखन्द !
Har Haal Mein Mera Dil-e-Be Qaid Hai Khurram
Kya Cheenay Ga Gunche Se Koi Zauq-e-Shakar Khand !
*

चुप रह न सका हज़रत-ए-यज़दाँ में भी इक़बाल 
कोई करता इस बन्दा-ए-गुस्ताख़ का मुँह बंद !
Will no one hush this too proud thing Iqbal
Whose tongue God’s presence‐chamber could not tie!  
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English Translation: Iqbal Urdu Blog