बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Hindustani Bachchon Ka Qaumi Geet | हिन्दुस्तानी बच्चों का क़ौमी गीत



चिश्ती ने जिस ज़मीं में पैग़ाम-ए-हक़ सुनाया 
नानक ने जिस चमन में वहदत का गीत गाया 
तातारियों ने जिसको अपना वतन बनाया 
जिसने हिजाज़ियों से दश्ते अरब छुड़ाया 
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है.

यूनानियों को जिसने हैरान कर दिया था 
सारे जहाँ को जिसने इल्मो हुनर दिया था 
मिट्टी को जिसकी हक़ ने ज़र का असर दिया था 
तुर्कों का जिसने दामन हीरों से भर दिया था 
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है.

टूटे थे जो सितारे फ़ारस के आसमाँ से 
फिर ताब देके जिसने चमकाए कहकशां से 
वहदत की लय सुनी थी दुनिया ने जिस मकाँ से 
मीर-ए-अरब (सल.) को आई ठण्डी हवा जहाँ से 
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है.

बन्दे कलीम जिसके परबत जहाँ के सीना 
नूहे नबी का आकर ठैरा जहाँ सफ़ीना 
रिफ़अत है जिस ज़मीं की बामे फ़लक का ज़ीना 
जन्नत की ज़िन्दगी है जिसकी फ़िज़ा में जीना 
मेरा वतन वही है, मेरा वतन वही है.
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