बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Tamheed | तम्हीद



(1)

न दैर में न हरम में ख़ुदी की बेदारी
क: ख़ावरां में है क़ौमों की रुह तरयाकी।
In fane and shrine the self in slumber deep is sunk,
It seems that soul of East an opiate strong has drunk.
*

अगर न सहल हों तुझ पर ज़मीं के हँगामे
बुरी है मस्ती-ए-अंदेशा हाए अफ़लाकी।
If freaks of Fate with smile on lips you can not face,
The secrets hid in firmament nʹre claim to trace.
*

तेरी निजात ग़म-ए-मर्ग से नहीं मुमकिन
क: तू ख़ुदी को समझता है पैकरे ख़ाकी।
Your anguish sharp for Death you can not keep at bay,
Because you deem that self is merely made of clay.
*

ज़माना अपने हवादिस छुपा नहीं सकता
तेरा हिजाब है क़ल्बो नज़र की नापाकी।
Time can conceal mishaps at all from you,
Alas! your heart and soul are foul and are not true.
*

अता हुआ ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-एशिया मुझको
क: मेरे शोले में है सरकशी-ओ-बेबाकी !
The straws and thorns of East (Asia) to me have been assigned,
For flame that burns in me is rash and unconfined
*

(2)

तेरा गुनाह है इक़बाल ! मजलिस आराई
अगरचे तू है मिसाल-ए-ज़माना कम पेवन्द।
Iqbal, you sin because the throngs you tingle,
Though keep aloof and seldom with them mingle.
*

जो कोकिनार के ख़ूगर थे, उन ग़रीबों को
तेरी नवा ने दिया ज़ौक़-ए-जज़्बा हाए बुलन्द।
Men wont to quaff extract from poppies drawn,
Have courage gained for deeds requiring brawn.
*

तड़प रहे हैं फ़ज़ा हाए नीलगूँ के लिए
वो पर शिकस्ता क: सहन-ए-सरा में थे ख़ुरसन्द।
The birds, who spite of pinions rent were glad,
In nests, for azure sky now feel so sad.
*

तेरी सज़ा है नवा-ए-सहर से महरूमी
मक़ाम-ए-शौक़-ओ-सुरूर-ओ-नज़र से महरूमी।
You ought to be deprived of songs of morn,
Deserve to miss delight and feel forlorn.
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English Translation: Iqbal Urdu Blog