बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Yeh Kon Ghazal Khwan | यह कौन ग़ज़लख़्वाँ



यह कौन ग़ज़लख़्वाँ है पुरसोज़-ओ-निशातंग़ेज़
अंदेशा-ए-दाना को करता है जुनूँ आमेज़।
Who is this composer of ghazals, who is burningly passionate and cheerful?
He makes the thoughts of the wise full of madness.
*

गो फ़क़्र भी रखता है अन्दाज़-ए-मलूकाना
ना-पुख़्ता है परवेज़ी बे-सल्तनत-ए-परवेज़।
Although faqr also has royal characteristics,
Kingship is only half complete without a kingdom.
*

अब हुजरा-ए-सूफ़ी में वो फ़क़्र नहीं बाक़ी
ख़ून-ए-दिल-ए-शेराँ हो जिस फ़क़्र की दस्तावेज़।
Now in the cell of the Sufi, the same faqr has not remained—
The poverty whose charter is written in the blood of the hearts of lions.
*

ऐ हल्क़ा-ए-दरवेशाँ ! वो मर्द-ए-ख़ुदा कैसा
हो जिसके गिरेबाँ में हंगामा-ए-रस्ताखेज़।
Ah circle of dervishes, see how the man of God is,
In whose collar is the tumult of Judgement’s Day.
*

जो ज़िक्र की गर्मी से शोले की तरह रोशन
जो फ़िक्र की सुरअत में बिजली से ज़्यादा तेज़।
who is as bright as a flame by the heat of repetition of God’s name;
Who is quicker than the lightning by the swiftness of his thought.
*

करती है मुलूकिय्यत आसार-ए-जुनूँ पैदा
अल्लाह के नश्तर हैं तैमूर हो या चंगेज़।
Kingship gives rise to signs of madness—
They are the scalpels of Allah, be they Taimur of Genghis.
*

यूँ दाद-ए-सुख़न मुझको देते हैं ईराक़-ओ-पारस
यह काफ़िर-ए-हिन्दी है बे-तेग़-ओ-सिनां खूँरेज़।
Thus Iraq and Persia give me praise for my verse:
This Indian infidels sheds blood without swords or spears.
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English Translation: Iqbal Urdu Blog