बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Funoon-e-Latifa | फुनून-ए-लतीफ़ा



ऐ अहले नज़र ! ज़ौक-ए-नज़र ख़ूब है लेकिन
जो शय की हक़ीक़त को न देखे वो नज़र क्या !
O people with observing eyes, a taste for observation is a good things,
But what good is observation if it does not see the inwardness of things?
*

मक़सूद-ए-हुनर सोज़-ए-हयात-ए-अबदी है
यह एक नफ़स या दो नफ़स मिस्ले शरर क्या !
The aim of art should be to generate a vital flame that never dies.
What use is a mere momentary spark?
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जिस से दिल-ए-दरिया मुतलातिम नहीं होता
ऐ क़तरा-ए-नेसाँ वो सदफ़ क्या वो गौहर क्या !
What good, O rain‐drop, if you do not agitate the bosom of the sea,
And are content to be a pearl lodged in a mother‐of‐pearl’s womb?
*

शायर की नवा हो क: मुग़न्नी का नफ़स हो
जिस से चमन अफ़सुर्दा हो वो बाग़-ए-सहर क्या !
What good a breath of morning breeze, Whether as poet’s verse or singer’s air,
If it can only make the garden wilt?
*

बे-मौअ'जज़ा दुनिया में उभरती नहीं क़ौमें
जो ज़र्ब-ए-कलीमी नहीं रखता वो हुनर क्या !
O never without miracles do people rise;
What good is art that does not have the impact of the rod of Moses?
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English Translation: Iqbal Urdu Blog
Photo: Georgian College, Canada