बाल-ए-जिबरील

[Bal-e-Jibreel][bleft]

बांग-ए-दरा

[Bang-e-Dra][bleft]

ज़र्ब-ए-कलीम

[Zarb-e-Kaleem][bleft]

Tu Abhi Rehguzar Me Hai | तू अभी रहगुज़र में है



तू अभी रहगुज़र में है क़ैद-ए-मक़ाम से गुज़र
मिस्र-ओ-हिजाज़ से गुज़र, पारस-ओ-शाम से गुज़र !
You are yet region‐bound, Transcend the limits of space;
Transcend the narrow climes of the East and the West.
*

जिस का अमल है बे-ग़रज़ उसकी जज़ा कुछ और है
हूर-ओ-ख़याम से गुज़र, बादा-ओ-जाम से गुज़र !
For selfless deeds of men rewards are less mundane;
Transcend the houris’ glances, the pure, celestial wine.
*

गरचे है दिलकश बहुत हुस्न-ए-फ़रंग की बहार
ताईरक-ए-बुलंद बाल,दाना-ओ-दाम से गुज़र !
Ravishing in its power is beauty in the West;
You bird of paradise, resist this earthly trap.
*

कोह शिगाफ़ तेरी ज़र्ब, तुझ से कुशाद शर्क-ओ-ग़र्ब
तेग़-ए-हिलाल की तरह ऐश-ए-नियाम से गुज़र !
With a mountain‐cleaving assault, bridging the East and West,
Despise all defences, and become a sheathless sword.
*

तेरा इमाम बे-हुज़ूर, तेरी नमाज़ बे-सुरूर
ऐसी नमाज़ से गुज़र, ऐसे इमाम से गुज़र !
Your imam is unabsorbed, Your prayer is uninspired,
Forsake an imam like him, forsake a prayer like this
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English Translation: Iqbal Urdu Blog